Tuesday, 31 August 2021

सितंबर में कौन-कौन से ग्रह राशि परिवर्तन करने जा रहे हैं - आचार्य अशोक नारायण

 


सितंबर
में कौन-कौन से ग्रह राशि परिवर्तन करने जा रहे हैं,-


शुक्र का तुला राशि में परिवर्तन (Venus Transit in Libra)
सितंबर माह का पहला राशि परिवर्तन तुला राशि में होने जा रहा है. यह राशि परिवर्तन बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है. ज्योतिष शास्त्र में शुक्र को तुला राशि का स्वामी माना गया है. पंचांग के अनुसार 06 सितंबर 2021 को शुक्र का तुला राशि में प्रवेश होगा.


मंगल का कन्या राशि में परिवर्तन (Mars Transit in Virgo)
06
सितंबर को तुला राशि के साथ कन्या राशि में भी बड़ा परिवर्तन होगा. इस दिन ग्रहों के सेनापति मंगल, कन्या राशि में जाएंगे. मंगल का कन्या राशि में गोचर सभी राशियों को प्रभावित करेगा.


गुरु का मकर राशि में परिवर्तन (Jupiter Transit in Capricorn)
सितंबर 2021 का सबसे बड़ा परिवर्तन मकर राशि में होने जा रहा है. पंचांग के अनुसार 14 सितंबर 2021 को गुरु मकर राशि में परिवर्तन करेंगे. वर्तमान समय में गुरु, कुंभ राशि में वक्री होकर गोचर कर रहे हैं. गुरु मकर राशि में नीच राजयोग बनाएंगे. मकर राशि में गुरु, शनि देव की युति होने जा रही है.


सूर्य का कन्या राशि परिवर्तन (Sun Transit in Virgo)
17
सितंबर 2021 को ग्रहों के अधिपति यानि नवग्रहों के राजा सूर्य देव राशि परिवर्तन करेंगे. सूर्य इस दिन कन्या राशि में परिवर्तन करेंगे. इसे कन्या संक्रांति भी कहा जाता है.


बुध का तुला राशि में परिवर्तन (Mercury Transit in Libra)
22
सितंबर 2021 को तुला राशि में फिर से बड़ा राशि परिवर्तन देखने को मिलेगा, इस दिन वाणी और बुद्धि के कारक, बुध ग्रह तुला राशि में गोचर करेंगे.


बुध वक्री 2021 (Mercury Retrograde 2021)
27
सितंबर 2021 को तुला राशि में बुध वक्री हो जाएंगे. बुध का वक्री होना महत्वपूर्ण माना जाता है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब कोई ग्रह वक्री यानि उल्टी चाल चलता है तो, उसके फलों में कमी जाती है.

 आचार्य अशोक नारायण 


Sunday, 13 June 2021

बोले हुए शब्द वापस नहीं आते - आचार्य अशोक नारायण

 बोले हुए शब्द वापस नहीं आते

 


        क बार की बात हैं, एक किसान ने अपने पड़ोसी को भला बुरा कह दिया। लेकिन कुछ दिन बाद उसे अपनी इस गलती का एहसास हो गया। लेकिन वापस सुलह कैसे करें, इसकी सलाह लेने के लिए एक संत के पास गया।
 
        किसान ने संत से कहा, “मैं अपने पड़ोसी को कहे हुए बुरे शब्द वापस लेना चाहता हूँ। आप कोई रास्ता बताइये।”
 
        तो संत ने किसान को बहुत सारे पंख देते हुए कहां, “जाओ, इन सब पंख को शहर के बीचो बीच चौराहे पर जाकर रख के आ जाओ।”
 
        किसान ने संत के कहे अनुसार पंख रख कर आया और वापस संत के पास पहुंच गया।
 
अब संत ने कहा, “अब वापस वहां जाओ औऱ सारे पंख समेट कर मेरे पास ले आओ।”
 
        किसान वापस वहां चौराहे गया, जहां उसने वो पंख रखे थे। लेकिन उसने जाकर देखा तो पाया कि वहां एक भी पंख नहीं बचा। सारे पंख हवा से इधर-उधर उड़ गए। अब किसान वापिस खाली हाथ लौट कर संत के पास आया और सारी घटना उनको बता दी।
 
        तब संत ने समझाया, “यही घटना तुम्हारे शब्दों के साथ भी होती हैं। तुम अपने मुंह से उन्हें आसानी से निकाल तो देते हो। लेकिन उन्हें वापस नहीं ले सकते। तुम वापस उस आदमी से जाकर माफी तो मांग सकते हो लेकिन उसके दिल के अंदर कहीं ना कहीं चोट जरूर लगी रहती हैं। जो वह कभी नहीं भूल पाएगा।”
 
इस कहानी से क्या शिक्षा मिलती हैं?
 
 बोली की चोट गोली से भी गहरी होती है। इसलिए अपने शब्दों से किसी को चोट ना पहुंचे इसका जरूर ध्यान रखें।

जय मां बगलामुखी
आचार्य अशोक नारायण
9312098199

Tuesday, 18 May 2021

शालिग्राम का रहस्य - आचार्य अशोक नारायण

                                                             शालिग्राम का रहस्य


    हिन्दू धर्म के तीन प्रमुख देवता हैं- ब्रह्मा, विष्णु और महेश। ब्रह्माजी को सृजन का देवता मानते हैं विष्णुजी पालनहार हैं और देवो के देव महादेव संहारक हैं। 

    हमेशा से मानव ने तीनों को प्रकृति तत्वों में खोजने का प्रयास किया है। तीनों के ही मनुष्य ने साकार रूप गढ़ने के लिए सर्वप्रथम भगवान ब्रह्मा को शंख, शिव को शिवलिंग और भगवान विष्णु को शालिग्राम रूप में सर्वोत्तम माना है।

     उल्लेखनीय है कि शंख सूर्य चंद्र के समान देवस्वरूप है जिसके मध्य में वरुण, पृष्ठ में ब्रह्मा तथा अग्र में गंगा और सरस्वती नदियों का वास है।

     शिवलिंग और शालिग्राम को भगवान का विग्रह रूप माना जाता है और पुराणों के अनुसार भगवान के इस विग्रह रूप की ही पूजा की जानी चाहिए। शिवलिंग जहां भगवान शंकर का प्रतीक है तो शालिग्राम भगवान विष्णु का।

          


शिवलिंग के तो भारत में लाखों मंदिर हैं, लेकिन शालग्रामजी का एक ही मंदिर है। आओ जानते हैं कि आखिकार क्या है- शालिग्रामजी की उत्पत्ति और पूजा का रहस्य।                           

 




शालिग्राम -

    नारद पुराण के अनुसार, एक समय दैत्यराज जलंधर के अत्याचारों से ऋषि-मुनि, देवता और मनुष्य सभी बहुत परेशान थे। वह बड़ा ही पराक्रमी और वीर था। इसके पीछे उसकी पतिव्रता धर्म का पालन करने वाली पत्नी वृंदा के पुण्यों का फल था, जिससे वह पराजित नहीं होता था। उससे परेशान देवता भगवान विष्णु के पास गए और उसे हराने का उपाय पूछा। तब भगवान श्रीहरि ने वृंदा का पतिव्रता धर्म तोड़ने का उपाय सोचा।

 

    भगवान विष्णु ने जलंधर का रूप धारण कर वृंदा को स्पर्श कर दिया। जिसके कारण वृंदा का पतिव्रता धर्म भंग हो गया और जलंधर युद्ध में मारा गया। 

    भगवान विष्णु से छले जाने तथा पति के वियोग से दुखी वृंदा ने भगवान विष्णु को श्राप दिया कि अपकी पत्नी का भी छल से हरण होगा तथा आपको पत्नी वियोग सहना होगा।   वृंदा ने भगवान विष्णु को निष्ठुर व्यवहार करने के कारण पत्थर होने का श्राप दियाथा। उसके कारण ही शालिग्राम स्वरुप में भगवान विष्णु अवतरित हुए|  यह श्राप देने के बाद वृंदा सती हो गई। उस स्थान पर तुलसी का पौधा उग गया। और भगवान विष्णु शालिग्राम रूप मैं पूजे जाने लगे |

 

शालिग्राम का मंदिर:--

शालिग्राम का प्रसिद्ध मंदिर मुक्तिनाथ में स्थित है यह वैष्णव संप्रदाय के प्रमुख मंदिरों में से एक है। यह तीर्थस्थान शालिग्राम भगवान के लिए प्रसिद्ध है। मुक्तिनाथ की यात्रा काफी मुश्किल है। माना जाता है कि यहां से लोगों को हर तरह के कष्टों से मुक्ति मिल जाती है।

 


मुक्तिनाथ नेपाल में स्थित है। _ काठमांडु से मुक्तिनाथ की यात्रा के लिए पोखरा जाना होता है। वहां से यात्रा शुरू होती है। पोखरा के लिए सड़क या हवाई मार्ग से जा सकते हैं। वहां से पुन: जोमसोम जाना होता है। यहां से मुक्तिनाथ जाने के लिए आप हेलिकॉप्टर या फ्लाइट ले सकते हैं। यात्री बस के माध्यम से भी यात्रा कर सकते हैं। सड़क मार्ग से जाने पर पोखरा पहुंचने के लिए कुल 200 कि.मी. की दूरी तय करनी होती है।_

 

शालिग्राम के प्रकार :--

शिवलिंग की तरह शालिग्राम भी बहुत दुर्लभ है। अधिकतर शालिग्राम नेपाल के मुक्तिनाथ, काली गण्डकी नदी के तट पर पाया जाता है। काले और भूरे शालिग्राम के अलावा सफेद, नीले और ज्योतियुक्त शालिग्राम का पाया जाना तो और भी दुर्लभ है। पूर्ण शालिग्राम में भगवाण विष्णु के चक्र की आकृति अंकित होती है।

 विष्णु के अवतारों के अनुसार शालिग्राम पाया जाता है। यदि गोल शालिग्राम है तो वह विष्णु का रूप गोपाल है।

  1. यदि शालिग्राम मछली के आकार का है तो यह श्री विष्णु के मत्स्य अवतार का प्रतीक है।
  2. यदि शालिग्राम कछुए के आकार का है तो यह भगवान के कच्छप और कूर्म अवतार का प्रतीक है।
  3. इसके अलावा शालिग्राम पर उभरने वाले चक्र और रेखाएं भी विष्णु के अन्य अवतारों और श्रीकृष्ण के कुल के लोगों को इंगित करती हैं। 

इस तरह लगभग 33 प्रकार के शालिग्राम होते हैं जिनमें से 24 प्रकार को विष्णु के 24 अवतारों से संबंधित माना गया है। माना जाता है कि ये सभी 24 शालिग्राम वर्ष की 24 एकादशी व्रत से संबंधित हैं।

          
जय मां बगलामुखी
आचार्य अशोक नारायण 
9312098199

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