Friday, 30 July 2021

पंचक क्या है और गारुड़ पुराण के समाधान - अशोक नारायण


            पंचक क्या है :

 ज्योतिष शास्त्र के अनुसार चन्द्र ग्रह का धनिष्ठा नक्षत्र के तृतीय चरण और शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद तथा रेवती नक्षत्र के चारों चरणों में भ्रमण काल पंचक काल कहलाता है। इस तरह चन्द्र ग्रह का कुम्भ और मीन राशी में भ्रमण पंचकों को जन्म देता है।

1.      पंचक में नहीं करते हैं ये पांच कार्य:-

'अग्नि-चौरभयं रोगो राजपीडा धनक्षतिः।

संग्रहे तृण-काष्ठानां कृते वस्वादि-पंचके।।'-मुहूर्त-चिंतामणि

 

अर्थात:- पंचक में तिनकों और काष्ठों के संग्रह से 

अग्निभय, चोरभय, रोगभय, राजभय एवं धनहानि 

संभव है।

1.लकड़ी एकत्र करना या खरीदना,

2. मकान पर छत डलवाना,

3. शव जलाना,

 4. पलंग या चारपाई बनवाना और

5.  दक्षिण दिशा की ओर यात्रा करना।


समाधान :

1.यदि लकड़ी खरीदना अनिवार्य हो तो पंचक काल समाप्त होने पर गायत्री माता के नाम का हवन कराएं।

2. यदि मकान पर छत डलवाना अनिवार्य हो तो मजदूरों को मिठाई खिलाने के पश्चात ही छत डलवाने का कार्य करें।

3. यदि पंचक काल में शव दाह करना अनिवार्य हो तो शव दाह करते समय पांच अलग पुतले बनाकर उन्हें भी आवश्य जलाएं।

4. इसी तरह यदि पंचक काल में पलंग या चारपाई लाना जरूरी हो तो पंचक काल की समाप्ति के पश्चात ही इस पलंग या चारपाई का प्रयोग करें।

5.अंत में यह कि यदि पंचक काल में दक्षिण दिशा की यात्रा करना अनिवार्य हो तो हनुमान मंदिर में फल चढ़ाकर यात्रा प्रारंभ कर सकते हैं।

ऐसा करने से पंचक दोष दूर हो जाता है।

पंचक में मृत्यु:-

गरुड़ पुराण सहित कई धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख है कि यदि पंचक में किसी की मृत्यु हो जाए तो उसके साथ उसी के कुल खानदान में पांच अन्य लोगों की मौत भी हो जाती है।

शास्त्र-कथन है-

'धनिष्ठ-पंचकं ग्रामे शद्भिषा-कुलपंचकम्।

पूर्वाभाद्रपदा-रथ्याः चोत्तरा गृहपंचकम्।

रेवती ग्रामबाह्यं एतत् पंचक-लक्षणम्।।'

 

आचार्यों के अनुसार धनिष्ठा से रेवती पर्यंत इन पांचों नक्षत्रों की क्रमशः पांच श्रेणियां हैं- ग्रामपंचक, कुलपंचक, रथ्यापंचक, गृहपंचक एवं ग्रामबाह्य पंचक।

            ऐसी मान्यता है कि यदि धनिष्ठा में जन्म-मरण हो, तो उस गांव-नगर में पांच और जन्म-मरण होता है। शतभिषा में हो तो उसी कुल में, पूर्वा में हो तो उसी मुहल्ले में, उत्तरा में हो तो उसी घर में और रेवती में हो तो दूसरे गांव-नगर में पांच बच्चों का जन्म एवं पांच लोगों की मृत्यु संभव है।

            मान्यतानुसार किसी नक्षत्र में किसी एक के जन्म से घर आदि में पांच बच्चों का जन्म तथा किसी एक व्यक्ति की मृत्यु होने पर पांच लोगों की मृत्यु होती है। ऐसे में पांच लोगों का मरना कुछ हद तक संभव है किन्तु किसी घर की पांच औरतें गर्भवती होंगी तभी तो पांच बच्चों का जन्म संभव है।

            पंचक में जन्म-मरण और पांच का सूचक है। जन्म खुशी है और गृह आदि में विभक्त इन नक्षत्रों के तथाकथित फल पांच गृहादि में होने वाले हैं, तो स्पष्ट है कि वहां विभिन्न प्रकार की खुशियां सकती हैं। पांच मृत्युओं का अभिप्राय देखें तो पांच गृहादि में रोग, कष्ट, दुःख आदि का आगम हो सकता है। कारण व्यथा, दुःख, भय, लज्जा, रोग, शोक, अपमान तथा मरण- मृत्यु के ये आठ भेद हैं। इसका मतलब यह कि जरूरी नहीं कि पांच की मृत्यु ही हो पांच को किसी प्रकार का कोई रोग, शोक या कष्ट हो सकता है।

 

पंचक का उपाय:-

'प्रेतस्य दाहं यमदिग्गमं त्यजेत् शय्या-वितानं गृह-गोपनादि च।'- मुहूर्त-चिंतामणि

            पंचक में मरने वाले व्यक्ति की शांति के लिए गरुड़ पुराण में उपाय सुझाए गए हैं। यदि विधि अनुसार यह कार्य किया जाए तो संकट टल जाता है। शव के साथ आटे, बेसन या कुश (सूखी घास) से बने पांच पुतले अर्थी पर रखकर इन पांचों का भी शव की तरह पूर्ण विधि-विधान से अंतिम संस्कार किया जाता है। ऐसा करने से पंचक दोष समाप्त हो जाता है।

            दूसरा यह कि गरुड़ पुराण अनुसार अगर पंचक में किसी की मृत्यु हो जाए तो उसमें कुछ सावधानियां बरतना चाहिए। सबसे पहले तो दाह-संस्कार संबंधित नक्षत्र के मंत्र से आहुति देकर नक्षत्र के मध्यकाल में किया जा सकता है। नियमपूर्वक दी गई आहुति पुण्यफल प्रदान करती हैं और मृत को  उत्तम गति मिलती है।

 

अशोक नारायण सक्सेना 






Sunday, 13 June 2021

बोले हुए शब्द वापस नहीं आते - आचार्य अशोक नारायण

 बोले हुए शब्द वापस नहीं आते

 


        क बार की बात हैं, एक किसान ने अपने पड़ोसी को भला बुरा कह दिया। लेकिन कुछ दिन बाद उसे अपनी इस गलती का एहसास हो गया। लेकिन वापस सुलह कैसे करें, इसकी सलाह लेने के लिए एक संत के पास गया।
 
        किसान ने संत से कहा, “मैं अपने पड़ोसी को कहे हुए बुरे शब्द वापस लेना चाहता हूँ। आप कोई रास्ता बताइये।”
 
        तो संत ने किसान को बहुत सारे पंख देते हुए कहां, “जाओ, इन सब पंख को शहर के बीचो बीच चौराहे पर जाकर रख के आ जाओ।”
 
        किसान ने संत के कहे अनुसार पंख रख कर आया और वापस संत के पास पहुंच गया।
 
अब संत ने कहा, “अब वापस वहां जाओ औऱ सारे पंख समेट कर मेरे पास ले आओ।”
 
        किसान वापस वहां चौराहे गया, जहां उसने वो पंख रखे थे। लेकिन उसने जाकर देखा तो पाया कि वहां एक भी पंख नहीं बचा। सारे पंख हवा से इधर-उधर उड़ गए। अब किसान वापिस खाली हाथ लौट कर संत के पास आया और सारी घटना उनको बता दी।
 
        तब संत ने समझाया, “यही घटना तुम्हारे शब्दों के साथ भी होती हैं। तुम अपने मुंह से उन्हें आसानी से निकाल तो देते हो। लेकिन उन्हें वापस नहीं ले सकते। तुम वापस उस आदमी से जाकर माफी तो मांग सकते हो लेकिन उसके दिल के अंदर कहीं ना कहीं चोट जरूर लगी रहती हैं। जो वह कभी नहीं भूल पाएगा।”
 
इस कहानी से क्या शिक्षा मिलती हैं?
 
 बोली की चोट गोली से भी गहरी होती है। इसलिए अपने शब्दों से किसी को चोट ना पहुंचे इसका जरूर ध्यान रखें।

जय मां बगलामुखी
आचार्य अशोक नारायण
9312098199

होलाष्‍टक से रहे सावधान न करें ये काम - आचार्य अशोक नारायण

 होलाष्‍टक से रहे सावधान न करें ये काम            सोमवार 27 फरवरी , 2023 से होलाष्टक लगने जा रहा है |  यह 8 दिनों का होता है और ...