Tuesday, 18 May 2021

शालिग्राम का रहस्य - आचार्य अशोक नारायण

                                                             शालिग्राम का रहस्य


    हिन्दू धर्म के तीन प्रमुख देवता हैं- ब्रह्मा, विष्णु और महेश। ब्रह्माजी को सृजन का देवता मानते हैं विष्णुजी पालनहार हैं और देवो के देव महादेव संहारक हैं। 

    हमेशा से मानव ने तीनों को प्रकृति तत्वों में खोजने का प्रयास किया है। तीनों के ही मनुष्य ने साकार रूप गढ़ने के लिए सर्वप्रथम भगवान ब्रह्मा को शंख, शिव को शिवलिंग और भगवान विष्णु को शालिग्राम रूप में सर्वोत्तम माना है।

     उल्लेखनीय है कि शंख सूर्य चंद्र के समान देवस्वरूप है जिसके मध्य में वरुण, पृष्ठ में ब्रह्मा तथा अग्र में गंगा और सरस्वती नदियों का वास है।

     शिवलिंग और शालिग्राम को भगवान का विग्रह रूप माना जाता है और पुराणों के अनुसार भगवान के इस विग्रह रूप की ही पूजा की जानी चाहिए। शिवलिंग जहां भगवान शंकर का प्रतीक है तो शालिग्राम भगवान विष्णु का।

          


शिवलिंग के तो भारत में लाखों मंदिर हैं, लेकिन शालग्रामजी का एक ही मंदिर है। आओ जानते हैं कि आखिकार क्या है- शालिग्रामजी की उत्पत्ति और पूजा का रहस्य।                           

 




शालिग्राम -

    नारद पुराण के अनुसार, एक समय दैत्यराज जलंधर के अत्याचारों से ऋषि-मुनि, देवता और मनुष्य सभी बहुत परेशान थे। वह बड़ा ही पराक्रमी और वीर था। इसके पीछे उसकी पतिव्रता धर्म का पालन करने वाली पत्नी वृंदा के पुण्यों का फल था, जिससे वह पराजित नहीं होता था। उससे परेशान देवता भगवान विष्णु के पास गए और उसे हराने का उपाय पूछा। तब भगवान श्रीहरि ने वृंदा का पतिव्रता धर्म तोड़ने का उपाय सोचा।

 

    भगवान विष्णु ने जलंधर का रूप धारण कर वृंदा को स्पर्श कर दिया। जिसके कारण वृंदा का पतिव्रता धर्म भंग हो गया और जलंधर युद्ध में मारा गया। 

    भगवान विष्णु से छले जाने तथा पति के वियोग से दुखी वृंदा ने भगवान विष्णु को श्राप दिया कि अपकी पत्नी का भी छल से हरण होगा तथा आपको पत्नी वियोग सहना होगा।   वृंदा ने भगवान विष्णु को निष्ठुर व्यवहार करने के कारण पत्थर होने का श्राप दियाथा। उसके कारण ही शालिग्राम स्वरुप में भगवान विष्णु अवतरित हुए|  यह श्राप देने के बाद वृंदा सती हो गई। उस स्थान पर तुलसी का पौधा उग गया। और भगवान विष्णु शालिग्राम रूप मैं पूजे जाने लगे |

 

शालिग्राम का मंदिर:--

शालिग्राम का प्रसिद्ध मंदिर मुक्तिनाथ में स्थित है यह वैष्णव संप्रदाय के प्रमुख मंदिरों में से एक है। यह तीर्थस्थान शालिग्राम भगवान के लिए प्रसिद्ध है। मुक्तिनाथ की यात्रा काफी मुश्किल है। माना जाता है कि यहां से लोगों को हर तरह के कष्टों से मुक्ति मिल जाती है।

 


मुक्तिनाथ नेपाल में स्थित है। _ काठमांडु से मुक्तिनाथ की यात्रा के लिए पोखरा जाना होता है। वहां से यात्रा शुरू होती है। पोखरा के लिए सड़क या हवाई मार्ग से जा सकते हैं। वहां से पुन: जोमसोम जाना होता है। यहां से मुक्तिनाथ जाने के लिए आप हेलिकॉप्टर या फ्लाइट ले सकते हैं। यात्री बस के माध्यम से भी यात्रा कर सकते हैं। सड़क मार्ग से जाने पर पोखरा पहुंचने के लिए कुल 200 कि.मी. की दूरी तय करनी होती है।_

 

शालिग्राम के प्रकार :--

शिवलिंग की तरह शालिग्राम भी बहुत दुर्लभ है। अधिकतर शालिग्राम नेपाल के मुक्तिनाथ, काली गण्डकी नदी के तट पर पाया जाता है। काले और भूरे शालिग्राम के अलावा सफेद, नीले और ज्योतियुक्त शालिग्राम का पाया जाना तो और भी दुर्लभ है। पूर्ण शालिग्राम में भगवाण विष्णु के चक्र की आकृति अंकित होती है।

 विष्णु के अवतारों के अनुसार शालिग्राम पाया जाता है। यदि गोल शालिग्राम है तो वह विष्णु का रूप गोपाल है।

  1. यदि शालिग्राम मछली के आकार का है तो यह श्री विष्णु के मत्स्य अवतार का प्रतीक है।
  2. यदि शालिग्राम कछुए के आकार का है तो यह भगवान के कच्छप और कूर्म अवतार का प्रतीक है।
  3. इसके अलावा शालिग्राम पर उभरने वाले चक्र और रेखाएं भी विष्णु के अन्य अवतारों और श्रीकृष्ण के कुल के लोगों को इंगित करती हैं। 

इस तरह लगभग 33 प्रकार के शालिग्राम होते हैं जिनमें से 24 प्रकार को विष्णु के 24 अवतारों से संबंधित माना गया है। माना जाता है कि ये सभी 24 शालिग्राम वर्ष की 24 एकादशी व्रत से संबंधित हैं।

          
जय मां बगलामुखी
आचार्य अशोक नारायण 
9312098199

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